स्वस्तिकासन

Swastikasana

स्वस्तिकासन

 

 

स्वस्तिकासन विधि

स्थिति:- स्वच्छ कम्बल या कपडे पर पैर फैलाकर बैठें।

विधि:- बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जंघा और पिंडली (calf, घुटने के नीचे का हिस्सा) और के बीच इस प्रकार स्थापित करें की बाएं पैर का तल छिप जाये उसके बाद दाहिने पैर के पंजे और तल को बाएं पैर के नीचे से जांघ और पिंडली के मध्य स्थापित करने से स्वस्तिकासन बन जाता है। ध्यान मुद्रा में बैठें तथा रीढ़ (spine) सीधी कर श्वास खींचकर यथाशक्ति रोकें।इसी प्रक्रिया को पैर बदलकर भी करें।

स्वस्तिकासन करना बहुत आसान है। इसके सरल तरीके का विपरण नीचे दिया जा रहा है।

 

  •  सबसे पहले पांव आगे फैलाकर जमीन पर बैठ जाएं।
  • अब आप बाएं पैर को भीतरी दाईं जांघ पर टिकाएं और दाएं पांव को भीतरी बाईं जांघ पर टिकाएं।
  • रीढ़  की हड्डी को सीधा रखें।
  • अगर ज्ञानमुद्रा में बैठते हैं तो और भी अच्छी बात है।
  • ध्यान रहे आपके घुटने जमीन से स्पंर्श  करे।
  • आपका का संपूर्ण शरीर, कमर तथा पीठ एक सीध में होनी चाहिए।

 

स्वस्तिकासन के लाभ

  1.  यह आसन आपके जीवन को आनंदमय बनाता है।
  2. यह आसन ध्यान के लिए एक अतिउत्तम योगाभ्यास है।
  3. इसके अभ्यास से तनाव एवं चिंता में बहुत सकारत्मक प्रभाव पड़ता है।
  4. अगर आपको बहुत पसीना आता है तो इस आसन के करने से बहुत लाभ मिलेगा।
  5. जिनके पांव सर्दियों में बहुत ठंडे रहता है उसके लिए यह योगाभ्यास लाभकारी है
  6. यह वायुरोग को दूर करता है।
  7. जब पसीने से पैरों में बदबू आती हो तो इसका अभ्यास प्रतिदिन करें।
  8. अगर आपको मानसिक एकाग्रता बढ़ानी हो तो इस योग का अभ्यास जरूर करें।
  9. लिंग तथा योनि के रोगों को दूर करने में सहायक है।
  10. अगर इसको सही तरीके से किया जाए तो कमर दर्द कम करने में भी सफलता मिलती है।
  11. इसके अभ्यास से सोचने एवम समझने की शक्ति बढ़ जाती है।
  12. इसके करने से शरीर की सभी व्याधियाँ विनष्ट हो जाती है शरीर को स्थिर करने में सहायक है।