How to make UPSC/UPPCS/PCS exam notes

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How to make UPSC/UPPCS/PCS exam notes

यह एक बहुत ही दिलचस्प सवाल है जो ज्यादातर अभ्यर्थियों के मन मे अस्पष्टता पैदा करता है। आप तौर पर लोगों की अलग-अलग राय होती है, जैसे कुछ लोग यह समझते हैं कि पढ़ाई शुरु करने के साथ ही नोट्स बनाना शुरु करें, कुछ अन्य सलाह देते हैं कि रीडिंग खत्म करने के बाद नोट्स बनाएं और कुछ लोग तो नोट्स न बानाने की भी सलाह देते हैं यह कहकर, कि यह तैयारी के लिये एक बड़ा और अत्यधिक संशोधन से भारा असंभव कार्य होगा। किन्तु हमारे लिये नोट्स बनाने के पीछे के कारणों को समझना बहुत महत्वपूर्ण है:

  • कुछ लोगों का मानना है कि उनकी तैयारी में नोट्स एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं और सवालों के समाधान के लिए वे नोट्स के अनुसार अध्ययन करते हैं। इस प्रकार से उन्हें संशोधन करते समय अन्य पुस्तकों से अध्ययन करने की कम से कम आवश्यकता पड़ती है।
  • कई लोग यह राय देते हैं कि अधिक अंक का पाने और उत्तर लेखन में विकास करने के लिये तैयारी के दौरान नोट्स का निर्माण करना बहुत ही आवश्यक है।
  • बहुत से अभ्यर्थियों का यह भी मानना है कि नोट्स बनाते समय पढ़ने और लिखने के निरंतर अभ्यास करते रह्ने से अध्ययन से जुड़े कई छोटे-बड़े महत्वपूर्ण बिन्दु आसानी से याद रहते हैं जो कि इस परीक्षा में की तैयारी के दृष्टिकोंण से अतिआवश्यक है।
  • कई अलग-अलग स्रोतों के अध्ययन के माध्यम से बनाये गये नोट्स में एक गाइड या पुस्तक की तुलना में अधिक से अधिक उदाहरण या मुख्य बिन्दु उपलब्ध हो जाते हैं।
  • आपके बनाये गये नोट्स ऐसे अवसरों पर बहुत योगदान देते हैं आपको जब किसी विषय या टापिक पर एक व्याख्यान, भाषण या चर्चा में भाग लेने के लिए कहा जाता है। ध्यान रहे कि नोट्स निर्माण के कौशल से आपको किसी विषय पर उससे जुड़ी विषयवस्तु और आवश्यक बिंदु के रिकॉर्ड याद रखने में मदद मिलती है, जिससे आपको व्याख्यान  करने में या लिखते समय सही अनुक्रम के साथ वह विषय समझ में आ जाता है।

नोट्स कब बनाएं और कब पढ़ें?


शुरुआत से ही नोट्स का निर्माण करना शुरू कर देना सबसे आम गलती है जो प्राय: उम्मीदवार करते हैं,  जानिये कि प्रारंभ से ही नोट्स बनाने में क्या खराबी है:

तैयारी की शुरुआत में किसी विषय का अध्ययन करते समय ऐसा लगता है कि उस विषय से जुड़ा हर दूसरा बिंदु या जानकारी महत्वपूर्ण है। नये अभ्यर्थियों में यह एक आम समस्या होती है कि प्रारंभिक चरणों में विषय की स्पष्टता की कमी के कारण उन्हें महत्त्वपूर्ण बिंदुओं के बीच के अंतर को समझने में कठिनाई होती है। और इसी के चलते उनके द्वारा बनाए गये नोट्स उसके निर्माण में प्रयुक्त किये गये स्रोतों की एक सटीक कापी बन जाती हैं, जो नोट्स बनाने के उद्देश्य को बेकार कर देता है।

अध्ययन दूसरे या तीसरे स्तर में पहुंचने के बाद (जब विषयों की समझ का निर्माण हो जाए।) नोट्स बनाना शुरू करना उचित है क्योंकि इस स्तर पर आप विषय से पर्याप्त रूप से वाकिफ हो चुके हैं और आसानी से सबसे अधिक प्रासंगिक बिंदुओं और जानकारियों चुन सकते हैं। नोट्स बनाने से आपको परीक्षाओं के लिये अपनी तैयारी में एक बेहतर परिप्रेक्ष्य प्राप्त होता हैं। नोट्स ऐसा होना चाहिए, जो भाषा मे संदर्भित हो, और एक साधारण अभ्यर्थी भी उसे समझकर याद कर सकता हो।

  • नोट: जो कुछ आपको समझ में आता है वह नोट्स में शामिल किया जाना चाहिए।

    नोट्स की जरूरत विशेष रूप से विस्तृत उत्तर लिखने के समय होती है, जिससे किसी विषय से संबंधित मुख्य बिंदुओं और उस पर व्यापक किन्तु संबंधित व्यख्यान देने में मदद मिलती है। यह आपको विषय के संबंधित विस्तृत क्षेत्रों तथा विभिन्न दृष्टिकोणों से जवाब देने में मदद करता है।
  • विषयों में प्रयुक्त हुये कीवर्ड्स (Keywords / Terms) को नोट किया जाना चाहिए और इसे अपने शब्दों में संक्षेपित किया जाना चाहिए। यह युक्ति आपको किसी विषय, मुद्दे या टापिक पर आपकी समझ और विचारों को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

नोट्स कैसे तैयार करें?


नोट बनाने के कुछ महत्वपूर्ण नियमों को देखें:

  • नोट्स चयनात्मक और संक्षिप्त होना चाहिए। प्रारंभिक रीडिंग के बाद, अध्याय से महत्वपूर्ण जानकारी निकालने और यथासंभव संक्षिप्त रूप से नोट्स को संशोधित करना महत्वपूर्ण होता है।
  • उन मुख्य विषयों के लिए अच्छे से नोट्स  बनायें जो पाठ्यक्रम में स्पष्ट रूप से समझ में आ रहे हैं।
  • अत्यंत सरल और महत्वपूर्ण बिंदुओं के एक साथ संगठित रखें जिससे बाद में आवश्यकता होने पर अधिक से अधिक विवरणों को समायोजित किया जा सके।
  • नोट्स में पाठ्यक्रमों के अनुसार अलग-अलग अनुभाग बनायें, और पाठ्यक्रम को जितना संभव हो उतना कवर करें।
  • यदि आपको अपनी नोट्स को जटिल नहीं बनाना है, तो यह सलाह दी जाती है कि आप इसके लिए बहुत अधिक समय और प्रयास बर्बाद न करें।