ता सिन्धु घाटी सभ्यमें व्यापार और वाणिज्य

ता सिन्धु घाटी सभ्यमें व्यापार और वाणिज्य

ता सिन्धु घाटी सभ्यमें व्यापार और वाणिज्य

बलूचान सुेगेोर- इसका पता 1927 मजाजडे नेलगाया था। 1962 मजाजडे नेइसका पुराेषण कया। यह ल दा नदी केकनारेत ह।ै यहाँएक बरगाह, दगुएवं नचलेनगर क परखे ा मली। एक बरगाह के प मसवतः सुसता, फारस एवं बेबीलोन केम होनेवालेापार मइस ल नेमहपूणभूमका नभाई होगी। सोाकोह – यह शादी कौर नदी केमुहानेपर त ह।ै 1962 मइसेडे नेखोजा था। यहाँपर भी ऊपरी एवं नचली दो टीलेमलेह।यह बरगाह न होकर समु तट एवं समु सेदरूवत भू-भाग केम ापार का के रहा होगा। डाबरकोट – यह वदार नदी केमुहानेपर त ह।ै

 

ता सिन्धु घाटी सभ्यमें व्यापार और वाणिज्य
सिन्धु घाटी सभ्यता के हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल आदि नगरों की समृद्धि का प्रमुख स्रोत व्यापार और वाणिज्य था. ये सारे व्यापार भारत के विभिन्न क्षेत्रों तथा विदेशों से जल-स्थल दोनों मार्ग से हुआ करते थे. वास्तव में व्यापार के बिना न तो सुमेर की सभ्यता का विकास होता और न ही सिन्धु घाटी सभ्यता का क्योंकि दोनों ही क्षेत्रों में कच्चे माल और प्राकृतिक संपदा का अभाव है.

यदि व्यापारिक संगठन की बात की जाए तो निश्चय ही इतनी दूर के देशों से बड़े पैमाने पर इतर क्षेत्रों से व्यापार हेतु अच्छा व्यापारिक संगठन रहा होगा. नगरों में कच्चा माल आस-पड़ोस तथा सुदूर स्थानों से उपलब्ध किया जाता था. जिन-जिन स्थानों के कच्चे माल का मोहनजोदड़ो में आयात किया जाता था, इनके सम्बन्ध में विद्वानों ने अनुमान लगाया है जिसका हम संक्षेप में नीचे उल्लेख कर रहे हैं –